तेनालीराम और जादुई गधा – अंगूठी चोर कैसे पकड़ा

संक्षेप में: विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय की कीमती अंगूठी चोरी हो गई। शक महल के कुछ सेवकों पर था। तेनालीराम ने एक गधे को अंधेरे कमरे में बंधवाया और कहा, “यह जादुई गधा है। जो भी इसकी पूंछ पकड़ेगा, अगर वह चोर हुआ तो गधा ढेंचू-ढेंचू करेगा।” हर सेवक अंदर गया। बाद में तेनाली ने सबके हाथ देखे — सबके हाथ काले थे, सिर्फ़ एक के साफ़ थे। पूंछ पर कालिख लगी थी, और चोर ने डर के मारे पूंछ छुई ही नहीं थी!

तेनालीराम और जादुई गधा — कहानी

विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय के पास एक बहुत कीमती हीरे की अंगूठी थी। एक दिन वे स्नान के लिए गए तो अंगूठी अपने कक्ष में रख दी। लौटकर देखा तो अंगूठी ग़ायब थी।

उस समय कक्ष के आसपास सिर्फ़ बारह सेवक काम कर रहे थे। राजा ने सबसे पूछा, पर सबने हाथ जोड़कर कहा, “महाराज, हमने अंगूठी नहीं ली।” राजा समझ नहीं पा रहे थे कि किस पर भरोसा करें और किस पर नहीं। वे किसी बेकसूर को सज़ा भी नहीं देना चाहते थे।

उन्होंने तेनालीराम को बुलाया। तेनाली ने पूरी बात सुनी और कहा, “महाराज, चिंता मत कीजिए। कल सुबह तक चोर पकड़ा जाएगा। बस मुझे एक गधा और एक अंधेरा कमरा चाहिए।”

राजा हैरान हुए, पर उन्होंने तेनाली पर भरोसा किया। अगले दिन तेनाली एक साधारण-सा गधा लेकर आया और उसे महल के एक अंधेरे कमरे में बांध दिया। फिर सब सेवकों को बुलाकर बोला:

“यह कोई मामूली गधा नहीं, जादुई गधा है। तुम सबको एक-एक करके इस अंधेरे कमरे में जाना है और गधे की पूंछ पकड़कर कहना है — ‘मैंने अंगूठी नहीं चुराई।’ अगर कहने वाला सच्चा होगा, तो गधा चुप रहेगा। पर अगर चोर ने पूंछ पकड़ी, तो गधा ज़ोर से ढेंचू-ढेंचू करेगा और सबको पता चल जाएगा।”

सेवक एक-एक करके कमरे में जाने लगे। हर कोई कुछ देर बाद बाहर आता। गधा पूरे समय चुप रहा — एक बार भी नहीं बोला।

जब सब बाहर आ गए, तो राजा ने निराश होकर कहा, “तेनाली, गधा तो बोला ही नहीं। तुम्हारी चाल नाकाम हो गई।”

तेनाली मुस्कुराया, “महाराज, असली जादू तो अब दिखेगा।” उसने सब सेवकों से कहा, “अपने दोनों हाथ आगे करो।”

सबने हाथ आगे किए। ग्यारह सेवकों की हथेलियां काली थीं। सिर्फ़ एक सेवक के हाथ बिल्कुल साफ़ थे।

तेनाली ने उसी की ओर इशारा किया, “महाराज, यही है चोर!”

राजा ने हैरानी से पूछा, “यह कैसे?” तेनाली ने समझाया, “महाराज, मैंने गधे की पूंछ पर कालिख लगा दी थी। जो सेवक सच्चे थे, उन्हें कोई डर नहीं था, इसलिए उन्होंने पूंछ पकड़ी और उनके हाथ काले हो गए। पर चोर डर गया कि गधा बोल पड़ेगा, इसलिए उसने पूंछ छुई ही नहीं। उसके साफ़ हाथ ही उसका सबूत हैं।”

चोर सेवक ने रोते हुए अपनी ग़लती मान ली और अंगूठी लौटा दी। राजा ने तेनाली की बुद्धि की ख़ूब तारीफ़ की और उसे इनाम दिया।

📖 कहानी की सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा इंसान निडर होता है, जबकि ग़लत काम करने वाला अपने ही डर से पकड़ा जाता है। किसी बेकसूर को सज़ा देने से पहले सच का पता लगाना चाहिए, और इसके लिए सूझबूझ सबसे बड़ा हथियार है।

बच्चों से पूछें

  1. तेनालीराम ने गधे की पूंछ पर क्या लगाया था?
  2. चोर के हाथ साफ़ क्यों रह गए?
  3. यह कहानी अकबर-बीरबल की किस कहानी से मिलती-जुलती है?

तेनालीराम के किस्से दक्षिण भारत से पूरे देश में फैली लोककथाएं हैं, ऐतिहासिक घटनाएं नहीं। यह कहानी उसी लोक परंपरा का हमारे अपने शब्दों में पुनर्कथन है। और पढ़ें: तेनालीराम की कहानियां · तेनालीराम और चोर · चोर की दाढ़ी में तिनका

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तेनालीराम और जादुई गधा कहानी क्या है?

राजा कृष्णदेव राय की अंगूठी चोरी हुई। तेनालीराम ने अंधेरे कमरे में गधा बांधकर कहा कि चोर के पूंछ पकड़ने पर गधा बोलेगा। उसने पूंछ पर कालिख लगा दी थी। सच्चे सेवकों ने पूंछ पकड़ी और उनके हाथ काले हो गए, पर डरे हुए चोर के हाथ साफ़ रहे।

तेनालीराम ने चोर को कैसे पकड़ा?

तेनालीराम ने गधे की पूंछ पर कालिख लगा दी और कहा कि यह जादुई गधा चोर के छूने पर बोलेगा। चोर डर के मारे पूंछ को छुए बिना बाहर आ गया। बाद में सबके हाथ देखे गए — केवल चोर के हाथ साफ़ थे, जिससे वह पकड़ा गया।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

इस कहानी से सीख मिलती है कि सच्चा इंसान निडर रहता है और ग़लत काम करने वाला अपने ही डर से पकड़ा जाता है। किसी बेकसूर को सज़ा देने से पहले सच का पता लगाना चाहिए, और मुश्किल समस्याओं को सूझबूझ से सुलझाया जा सकता है।

तेनालीराम कौन थे?

तेनालीराम, जिन्हें तेनाली रामकृष्ण भी कहते हैं, सोलहवीं सदी में विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार के कवि माने जाते हैं। उनकी हाज़िरजवाबी और बुद्धि के किस्से लोककथाओं के रूप में पूरे भारत में लोकप्रिय हैं।

यह कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए है?

तेनालीराम और जादुई गधा की कहानी 6 से 12 साल के बच्चों के लिए बहुत अच्छी है। इसमें रहस्य भी है और मज़ेदार अंत भी, जो बच्चों को सोचने पर मजबूर करता है। इसे जासूसी पहेली की तरह सुनाकर बच्चों से अंत का अनुमान भी लगवाया जा सकता है।

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