पूस की रात कहानी का सारांश – प्रेमचंद
गरीब किसान हल्कू कंबल के लिए जोड़े तीन रुपये कर्ज़ चुकाने में दे देता है। पूस की कड़ाके की ठंडी रात वह अपने कुत्ते जबरा के साथ खेत की रखवाली करता है, पर ठंड से हारकर सो जाता है और नीलगाएं फसल चर जाती हैं। कहानी किसान की गरीबी और मजबूरी को दिखाती है।