संक्षेप में: गर्मी और सूखे के दिनों में तेनालीराम ने देखा कि कुछ चोर उसके घर पर नज़र रखे हुए हैं। उसने जान-बूझकर ज़ोर से पत्नी से कहा कि कीमती गहनों का संदूक कुएं में छिपा दिया है। रातभर चोर कुएं से बाल्टी भर-भरकर पानी निकालते रहे — और तेनालीराम का सूखा बगीचा बिना मेहनत के सिंच गया।
सूखा और परेशानी
विजयनगर में उस साल बारिश बहुत कम हुई थी। तेनालीराम के घर के पीछे एक सुंदर बगीचा था, पर पानी न मिलने से पौधे मुरझाने लगे थे। घर में कुआं तो था, पर उसका पानी बहुत नीचे चला गया था। रोज़ बाल्टी खींचकर बगीचे को पानी देना बहुत थका देने वाला काम था।
चोरों की नज़र
एक शाम तेनालीराम ने देखा कि उसके घर के पास झाड़ियों में कुछ लोग छिपकर बैठे हैं और बार-बार उसके घर की ओर झांक रहे हैं। वह समझ गया, “ये चोर हैं। रात में घर में घुसने की योजना बना रहे हैं।”
तेनालीराम घबराया नहीं। उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई।
तेनालीराम की ऊंची आवाज़
वह घर के अंदर गया और इतनी ज़ोर से बोला कि झाड़ियों तक आवाज़ पहुंचे, “सुनती हो! आजकल शहर में बहुत चोरियां हो रही हैं। हमें अपने गहनों और सोने के सिक्कों को बचाना होगा।”
उसकी पत्नी हैरान हुई, पर तेनालीराम ने इशारे से समझा दिया। वह बोला, “आज रात हम अपना सारा कीमती सामान एक संदूक में भरकर कुएं में डाल देंगे। वहां कोई ढूंढ नहीं पाएगा।”
फिर उसने एक पुराने संदूक में पत्थर और ईंटें भरीं और उसे “धम्म!” से कुएं में फेंक दिया। चोरों ने यह सब देखा और खुश हो गए।
रातभर की “मेहनत”
आधी रात को चोर चुपके से कुएं के पास पहुंचे। संदूक गहरे पानी में था। उसे निकालने के लिए पहले कुएं का पानी कम करना ज़रूरी था। चोरों ने बाल्टी उठाई और पानी निकालना शुरू किया।
पानी बहता कहां? कुएं के पास ही बगीचे की नालियां थीं। चोर जितना पानी निकालते, वह सीधे बगीचे के पौधों तक पहुंचता। पूरी रात चोर पसीना बहाते रहे — बाल्टी पर बाल्टी।
भोर होने लगी। थककर चूर चोरों ने आखिरकार संदूक निकाला। खोला तो उसमें सिर्फ़ पत्थर और ईंटें थीं!
सुबह का नज़ारा
तभी तेनालीराम बाहर आया और मुस्कुराकर बोला, “धन्यवाद, दोस्तों! कई दिनों से मेरा बगीचा प्यासा था। आपने तो पूरी रात मेहनत करके उसे सींच दिया।”
चोर समझ गए कि उन्हें बेवकूफ़ बनाया गया है। शर्मिंदा होकर वे भाग खड़े हुए। उधर तेनालीराम का बगीचा फिर से हरा-भरा हो गया।
📖 कहानी की सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मुश्किल समय में घबराने के बजाय दिमाग से काम लेना चाहिए। समझदारी से मुसीबत को भी फ़ायदे में बदला जा सकता है, और बुरी नीयत वालों की मेहनत अक्सर उन्हीं पर उल्टी पड़ती है।
कहानी के पात्र
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| तेनालीराम | चतुर कवि, जिसने चोरों से बगीचा सिंचवाया |
| तेनालीराम की पत्नी | जिसने चाल में साथ दिया |
| चोर | जो लालच में रातभर पानी निकालते रहे |
बच्चों से पूछें
- तेनालीराम को कैसे पता चला कि चोर उसके घर पर नज़र रख रहे हैं?
- चोरों ने रातभर कुएं से पानी क्यों निकाला?
- क्या आपने कभी किसी मुश्किल को समझदारी से अपने फ़ायदे में बदला है?
तेनालीराम के किस्से दक्षिण भारत से पूरे देश में फैली लोककथाएं हैं, ऐतिहासिक घटनाएं नहीं। यह कहानी उसी लोक परंपरा का हमारे अपने शब्दों में पुनर्कथन है। और पढ़ें: तेनालीराम की कहानियां
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तेनालीराम और चोर कहानी की सीख क्या है?
यह कहानी सिखाती है कि मुश्किल समय में घबराने के बजाय दिमाग से काम लेना चाहिए। तेनालीराम ने चोरों को पकड़ने के बजाय ऐसी चाल चली कि वे रातभर उसका बगीचा सींचते रहे। समझदारी से मुसीबत को भी फ़ायदे में बदला जा सकता है।
तेनालीराम ने चोरों से बगीचा कैसे सिंचवाया?
तेनालीराम ने ज़ोर से कहा कि गहनों का संदूक कुएं में छिपा दिया है और पत्थरों से भरा संदूक कुएं में डाल दिया। संदूक निकालने के लिए चोर रातभर कुएं से पानी निकालते रहे और वह पानी नालियों से होकर सीधे बगीचे में पहुंचता रहा।
तेनालीराम कौन थे?
तेनालीराम, जिन्हें तेनाली रामकृष्ण भी कहा जाता है, 16वीं सदी में विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के दरबार के कवि माने जाते हैं। वे अपनी हाज़िरजवाबी और हास्य के लिए प्रसिद्ध हैं। उनसे जुड़े ज़्यादातर मज़ेदार किस्से लोककथाएं हैं।
यह कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए है?
यह कहानी 7 से 12 साल के बच्चों के लिए अच्छी है, क्योंकि इसमें थोड़ा रोमांच, हास्य और चतुराई की सीख है। कहानी सुनाते समय बच्चों से पूछें कि अगर वे तेनालीराम होते, तो चोरों से निपटने के लिए क्या तरकीब निकालते।