नीला सियार की कहानी – पंचतंत्र (Blue Jackal Story in Hindi)
एक सियार नील के ड्रम में गिरकर नीला हो गया। जंगल के जानवरों ने उसे अनोखा प्राणी मानकर राजा बना दिया। पर एक रात दूसरे सियारों की हुआं-हुआं सुनकर वह भी चिल्ला उठा और उसकी असलियत खुल गई।
एक सियार नील के ड्रम में गिरकर नीला हो गया। जंगल के जानवरों ने उसे अनोखा प्राणी मानकर राजा बना दिया। पर एक रात दूसरे सियारों की हुआं-हुआं सुनकर वह भी चिल्ला उठा और उसकी असलियत खुल गई।
सूखे तालाब से बचाने के लिए दो हंस कछुए को डंडी के सहारे उड़ाकर ले चले। शर्त थी कि कछुआ मुंह नहीं खोलेगा। नीचे लोगों की बातें सुनकर कछुआ बोल पड़ा, डंडी छूट गई और वह गिर पड़ा।
घमंडी शेर भासुरक रोज़ एक जानवर खाता था। एक दिन छोटे खरगोश की बारी आई। उसने शेर को बताया कि कुएं में दूसरा शेर है। अपनी परछाईं को दुश्मन समझकर भासुरक कुएं में कूद गया और जंगल बच गया।
जामुन के पेड़ पर रहने वाले बंदर ने मगरमच्छ से दोस्ती की और रोज़ उसे मीठे जामुन दिए। मगरमच्छ की पत्नी ने बंदर का कलेजा खाने की ज़िद की। नदी के बीच धोखा खुलने पर बंदर ने समझदारी से अपनी जान बचाई।
एक कुत्ते को रोटी का टुकड़ा मिला। पुल पार करते हुए उसे पानी में अपनी परछाईं दिखी और उसने सोचा कि दूसरे कुत्ते के पास बड़ा टुकड़ा है। उसे छीनने के लिए भौंका तो अपनी रोटी भी पानी में गिर गई।
गरीब लकड़हारे की लोहे की कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। जल देवता ने सोने और चांदी की कुल्हाड़ी दिखाई, पर उसने सच बोलकर अपनी लोहे की कुल्हाड़ी ही मांगी। ईमानदारी से खुश होकर देवता ने उसे तीनों कुल्हाड़ियां दे दीं।
तेज़ दौड़ने वाले खरगोश ने धीमे कछुए का मज़ाक उड़ाया और दौड़ की शर्त लगाई। घमंड में खरगोश रास्ते में सो गया, जबकि कछुआ बिना रुके चलता रहा और दौड़ जीत गया।
जंगल के राजा शेर ने एक छोटे चूहे की जान बख्श दी। कुछ दिन बाद शेर शिकारी के जाल में फंस गया। तब उसी चूहे ने अपने तेज़ दांतों से जाल काटकर शेर को आज़ाद कराया।
गर्मी के दिन एक प्यासे कौए को घड़े में थोड़ा-सा पानी मिला, पर उसकी चोंच वहां तक नहीं पहुंची। उसने हार नहीं मानी और एक-एक कंकड़ घड़े में डाला। पानी ऊपर आ गया और कौए ने प्यास बुझाई।
दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान होने पर माता सती ने प्राण त्याग दिए। दुखी शिव उनका शरीर लेकर घूमने लगे, तब विष्णु के सुदर्शन चक्र से अंग अलग-अलग जगह गिरे और शक्तिपीठ बने। असम के नीलाचल पर्वत का कामाख्या मंदिर सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है।