गोवर्धन पूजा की कथा – श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत

ब्रजवासी हर साल इंद्र की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। नाराज़ इंद्र ने मूसलाधार बारिश की, तो कृष्ण ने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली पर उठाकर सबको बचाया।

धनतेरस की कथा – राजा हिम के पुत्र और यमदीप की कहानी

धनतेरस की प्रसिद्ध कथा राजा हिम के पुत्र की है, जिसकी नई दुल्हन ने दीपों की रोशनी और गहनों के ढेर से सर्प-रूप में आए यमराज को रात भर रोक दिया। इसी से यमदीप की परंपरा बनी। इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।

एकता में बल है – किसान और उसके चार बेटों की कहानी

एक बूढ़े किसान के चार बेटे आपस में हमेशा लड़ते थे। किसान ने उन्हें लकड़ियों का गट्ठर तोड़ने को दिया। अकेली लकड़ी आसानी से टूट गई, पर गट्ठर कोई नहीं तोड़ पाया। बेटों को एकता का असली मतलब समझ आ गया।

सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी – लालच बुरी बला

एक गरीब किसान की मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती थी। अमीर होते-होते किसान लालची हो गया और सारे अंडे एक साथ पाने के लिए उसने मुर्गी को ही मार डाला। अंदर कुछ नहीं मिला और रोज़ का अंडा भी चला गया।

भेड़िया आया की कहानी – झूठ बोलने वाला चरवाहा

एक चरवाहा लड़का मज़ाक में “भेड़िया आया!” चिल्लाकर गांव वालों को बार-बार बुलाता रहा। जब सच में भेड़िया आया, तो किसी ने उसकी बात पर भरोसा नहीं किया। यह कहानी सिखाती है कि झूठ बोलने वाले का सच भी कोई नहीं मानता।

लोमड़ी और अंगूर की कहानी – अंगूर खट्टे हैं

भूखी लोमड़ी ने बेल पर लटके अंगूर पाने के लिए बार-बार छलांग लगाई, पर पहुंच नहीं पाई। हारकर बोली, “अंगूर तो खट्टे हैं!” इसी कहानी से “अंगूर खट्टे हैं” कहावत बनी।

चींटी और टिड्डा की कहानी – मेहनत का फल

गर्मियों में चींटी सर्दी के लिए दाना जमा करती रही और टिड्डा गाता-बजाता रहा। सर्दी आई तो चींटी आराम से रही और टिड्डा भूखा। यह कहानी सिखाती है कि आज की मेहनत कल का सहारा बनती है।

छठ पूजा की कथा – छठी मैया और सूर्य देव की कहानी

छठ पूजा की सबसे प्रसिद्ध कथा राजा प्रियव्रत की है, जिनके मृत पुत्र को षष्ठी देवी (छठी मैया) ने जीवन दिया। तभी से कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है। कर्ण, द्रौपदी और सीता जी से जुड़ी कथाएं भी पढ़ें।

भाई दूज की कथा – यमराज और यमुना की कहानी

भाई दूज की कथा सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुना की है। बहन यमुना के बार-बार बुलाने पर यमराज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को उसके घर आए, तिलक लगवाया, भोजन किया और यह वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक करवाने वाले भाई को यम का भय नहीं रहेगा।

करवा चौथ व्रत कथा – वीरावती की कहानी

करवा चौथ की सबसे प्रसिद्ध कथा वीरावती की है, जिसने भाइयों के दिखाए नकली चांद को देखकर व्रत तोड़ दिया था। अपनी भूल समझकर उसने पूरी श्रद्धा से फिर व्रत रखा और पति का जीवन वापस पाया।