संक्षेप में: एक गरीब किसान के पास एक जादुई मुर्गी थी, जो रोज़ एक सोने का अंडा देती थी। किसान धीरे-धीरे अमीर हो गया, पर उसका लालच भी बढ़ता गया। एक दिन उसने सोचा कि मुर्गी के पेट में ढेर सारे अंडे होंगे, और उन्हें एक साथ पाने के लिए उसने मुर्गी को मार डाला। पेट में कुछ नहीं मिला और रोज़ मिलने वाला अंडा भी हमेशा के लिए चला गया।
सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी
एक गांव में रामू नाम का एक गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। उसके पास थोड़ी-सी ज़मीन, एक टूटी झोंपड़ी और कुछ मुर्गियां थीं। बड़ी मुश्किल से गुज़ारा होता था।
एक सुबह रामू मुर्गियों के दड़बे में अंडे उठाने गया तो उसकी आंखें फटी रह गईं। एक मुर्गी के नीचे चमचमाता सोने का अंडा पड़ा था! उसे लगा कोई सपना है। उसने अंडा उठाकर दांत से दबाया — वह सचमुच सोने का था।
रामू ने अंडा बाज़ार में बेचा और अच्छे-ख़ासे पैसे मिले। अगले दिन फिर वही हुआ — मुर्गी ने फिर एक सोने का अंडा दिया। फिर तीसरे दिन, चौथे दिन… हर रोज़ एक सोने का अंडा!
कुछ ही महीनों में रामू की ज़िंदगी बदल गई। टूटी झोंपड़ी की जगह पक्का मकान बन गया, खेत बड़े हो गए, घर में नौकर-चाकर आ गए। गांव वाले उसकी किस्मत पर हैरान थे।
पर जैसे-जैसे पैसा बढ़ा, रामू का लालच भी बढ़ने लगा। उसे रोज़ का एक अंडा अब कम लगने लगा। वह सोचता, “रोज़ एक-एक अंडे का इंतज़ार कौन करे? इस मुर्गी के पेट में तो सोने का ख़ज़ाना भरा होगा। अगर मैं सारे अंडे एक साथ निकाल लूं, तो एक ही दिन में सबसे अमीर बन जाऊंगा।”
उसकी पत्नी ने उसे समझाया, “ऐसा मत करो। जो रोज़ मिल रहा है, उसी में संतोष करो।” पर रामू के सिर पर लालच सवार था।
एक दिन उसने छुरी उठाई और मुर्गी को मार डाला। उसने जल्दी-जल्दी पेट चीरकर देखा — पर अंदर कुछ भी नहीं था! न कोई सोने का अंडा, न ख़ज़ाना। वह बिल्कुल आम मुर्गी जैसी थी।
रामू सिर पकड़कर बैठ गया। उसे अपनी मूर्खता पर बहुत पछतावा हुआ। लालच में आकर उसने अपनी रोज़ की कमाई का ज़रिया ही ख़त्म कर दिया था। उसकी पत्नी ने दुखी होकर कहा, “लालच बुरी बला है। ज़्यादा के चक्कर में हमने जो था, वह भी खो दिया।”
📖 कहानी की सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लालच बुरी बला है। जो हमारे पास है, उसमें संतोष रखना चाहिए। जल्दी और ज़्यादा पाने के लालच में अक्सर हम वह भी खो देते हैं, जो हमें धीरे-धीरे पर पक्के तौर पर मिल रहा होता है।
बच्चों से पूछें
- रामू की ज़िंदगी सोने के अंडों से कैसे बदली?
- रामू ने मुर्गी को क्यों मारा? क्या यह सही था?
- आपके हिसाब से रामू को क्या करना चाहिए था?
स्रोत: यह ईसप की दंतकथाओं (Aesop’s Fables, लगभग 2500 साल पुरानी, सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित है। कहानी हमारे अपने शब्दों में, भारतीय बच्चों के लिए दोबारा लिखी गई है। और पढ़ें: नैतिक कहानियां · लालची कुत्ता · लोमड़ी और अंगूर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी क्या है?
एक गरीब किसान की मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती थी, जिससे वह अमीर हो गया। लालच में आकर उसने सोचा कि मुर्गी के पेट में ढेर सारे अंडे होंगे और उसे मार डाला। पेट में कुछ नहीं मिला और रोज़ का सोने का अंडा भी हमेशा के लिए चला गया।
सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी से क्या सीख मिलती है?
इस कहानी से सीख मिलती है कि लालच बुरी बला है। जो हमारे पास है उसमें संतोष रखना चाहिए। जल्दी और ज़्यादा पाने के चक्कर में हम अक्सर वह भी खो देते हैं जो हमें नियमित रूप से मिल रहा होता है।
किसान ने मुर्गी को क्यों मारा?
किसान लालची हो गया था। उसे रोज़ का एक सोने का अंडा कम लगने लगा। उसने सोचा कि मुर्गी के पेट में सोने का ख़ज़ाना भरा होगा और सारे अंडे एक साथ निकालकर वह एक दिन में सबसे अमीर बन जाएगा। इसी लालच में उसने मुर्गी को मार दिया।
यह कहानी किसने लिखी है?
सोने का अंडा देने वाली मुर्गी (या हंस) की कहानी प्राचीन यूनानी कथाकार ईसप की दंतकथाओं से ली गई है, जो सार्वजनिक डोमेन में हैं। भारत में इसे मुर्गी और कहीं-कहीं हंस के साथ सुनाया जाता है। यहां यह हमारे अपने शब्दों में है।
लालच बुरी बला है का अर्थ क्या है?
“लालच बुरी बला है” का अर्थ है कि ज़रूरत से ज़्यादा पाने की इच्छा इंसान को मुसीबत में डाल देती है। लालची व्यक्ति सोच-समझ खो देता है और अपना ही नुकसान कर बैठता है, जैसे इस कहानी में किसान ने अपनी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मार दिया।