संक्षेप में: एक भूखी लोमड़ी ने बेल पर लटके रसीले अंगूर देखे। उसने उन्हें पाने के लिए कई बार ऊंची छलांग लगाई, पर हर बार नाकाम रही। आख़िर में थककर वह यह कहते हुए चली गई, “ये अंगूर तो खट्टे हैं, मुझे चाहिए ही नहीं।” इसी कहानी से मशहूर कहावत बनी — अंगूर खट्टे हैं।
लोमड़ी और अंगूर की कहानी
गर्मी की एक दोपहर एक लोमड़ी जंगल में भटक रही थी। सुबह से उसे कुछ खाने को नहीं मिला था, इसलिए पेट में चूहे कूद रहे थे।
चलते-चलते वह एक बाग में पहुंची। वहां एक ऊंची बेल पर अंगूर के गुच्छे लटक रहे थे — बैंगनी, रसीले और धूप में चमकते हुए। लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया। उसने सोचा, “वाह! इन मीठे अंगूरों से तो मेरी भूख भी मिटेगी और प्यास भी।”
वह थोड़ा पीछे हटी, दौड़कर आई और ज़ोर से छलांग लगाई। पर अंगूर बहुत ऊंचे थे, उसके पंजे वहां तक नहीं पहुंचे और वह धम्म से नीचे गिर पड़ी।
“कोई बात नहीं, इस बार और ऊंचा कूदूंगी,” उसने सोचा। उसने दूसरी बार छलांग लगाई, फिर तीसरी बार, फिर चौथी बार। हर बार अंगूर उससे कुछ इंच दूर रह जाते।
काफ़ी देर तक कोशिश करने के बाद लोमड़ी थककर हांफने लगी। उसने ऊपर देखा, फिर इधर-उधर देखा कि कहीं कोई उसे हारते हुए देख तो नहीं रहा।
फिर उसने नाक सिकोड़ी और मुंह बनाकर बोली, “हुंह! ये अंगूर तो खट्टे हैं। इन्हें खाकर कौन अपने दांत खट्टे करे? मुझे ये चाहिए ही नहीं।” और वह अकड़ते हुए वहां से चली गई।
पेड़ पर बैठी एक चिड़िया यह सब देख रही थी। वह मुस्कुराई और बोली, “अंगूर खट्टे नहीं थे, लोमड़ी रानी। बस तुम उन तक पहुंच नहीं पाईं।”
📖 कहानी की सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जब कोई चीज़ हमें न मिले, तो उसकी बुराई करके अपनी हार नहीं छिपानी चाहिए। अपनी कमी ईमानदारी से मानें और फिर किसी नए, समझदार तरीके से कोशिश करें।
“अंगूर खट्टे हैं” कहावत का अर्थ
जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को पाने में नाकाम रहता है और फिर उसी चीज़ को बेकार या बुरा बताने लगता है, तो कहते हैं — “अंगूर खट्टे हैं”। जैसे, कोई क्रिकेट टीम में न चुना जाए और कहे, “मुझे तो क्रिकेट पसंद ही नहीं।”
बच्चों से पूछें
- लोमड़ी ने अंगूर को खट्टा क्यों कहा?
- अगर आप लोमड़ी होते तो अंगूर पाने के लिए और क्या तरीका अपनाते?
- “अंगूर खट्टे हैं” कहावत का एक उदाहरण अपने शब्दों में बताइए।
स्रोत: यह ईसप की दंतकथाओं (Aesop’s Fables, लगभग 2500 साल पुरानी, सार्वजनिक डोमेन) पर आधारित है। कहानी हमारे अपने शब्दों में, भारतीय बच्चों के लिए दोबारा लिखी गई है। और पढ़ें: नैतिक कहानियां · लालची कुत्ता · शेर और चूहा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लोमड़ी और अंगूर की कहानी क्या है?
एक भूखी लोमड़ी ने बेल पर ऊंचे लटके अंगूर देखे और उन्हें पाने के लिए कई बार छलांग लगाई, पर पहुंच नहीं पाई। थककर उसने अपनी हार छिपाने के लिए कहा कि अंगूर खट्टे हैं और वहां से चली गई। इसी से “अंगूर खट्टे हैं” कहावत बनी।
अंगूर खट्टे हैं कहावत का अर्थ क्या है?
जब कोई किसी चीज़ को पाने में असफल हो जाए और फिर उसी चीज़ की बुराई करने लगे, तो कहते हैं “अंगूर खट्टे हैं”। यह अपनी नाकामी छिपाने के बहाने को दिखाता है। यह कहावत ईसप की लोमड़ी और अंगूर की कहानी से आई है।
लोमड़ी और अंगूर की कहानी से क्या सीख मिलती है?
इस कहानी से सीख मिलती है कि हार मिलने पर बहाने नहीं बनाने चाहिए और न ही किसी चीज़ की झूठी बुराई करनी चाहिए। अपनी कमी को ईमानदारी से स्वीकार करें और नए तरीके से फिर कोशिश करें। यही असली समझदारी है।
लोमड़ी और अंगूर की कहानी किसने लिखी?
यह कहानी प्राचीन यूनानी कथाकार ईसप की दंतकथाओं में से एक है, जो सार्वजनिक डोमेन में हैं। यह दुनिया की सबसे मशहूर नैतिक कहानियों में गिनी जाती है। यहां इसे बच्चों के लिए हमारे अपने सरल शब्दों में लिखा गया है।
लोमड़ी अंगूर तक क्यों नहीं पहुंच पाई?
अंगूर बेल पर बहुत ऊंचाई पर लटक रहे थे और लोमड़ी की छलांग उतनी ऊंची नहीं थी। उसने बार-बार कोशिश तो की, पर कोई दूसरा तरीका नहीं सोचा, जैसे किसी पत्थर पर चढ़ना या मदद मांगना। थककर उसने हार मान ली।