संक्षेप में: एक भूखा सियार कुत्तों से बचते हुए धोबी के नील वाले ड्रम में गिर गया और नीला हो गया। जंगल के जानवरों ने उसे अनोखा प्राणी मानकर राजा बना दिया। पर एक रात दूसरे सियारों की “हुआं-हुआं” सुनकर वह भी चिल्ला उठा और उसकी असलियत सबके सामने आ गई।
भूखा सियार
एक जंगल में चंडरव नाम का एक सियार रहता था। एक रात उसे बहुत भूख लगी। खाने की तलाश में वह जंगल से निकलकर पास के शहर में पहुंच गया।
शहर के कुत्तों ने उसे देखते ही भौंकना शुरू कर दिया और उसके पीछे दौड़ पड़े। घबराया हुआ सियार जान बचाकर भागा और एक घर के आंगन में घुस गया।
नील का ड्रम
वह घर एक धोबी का था। आंगन में नीले रंग (नील) से भरा एक बड़ा ड्रम रखा था। अंधेरे में सियार सीधा उसी ड्रम में जा गिरा।
कुत्ते उसे ढूंढ नहीं पाए और लौट गए। जब सियार ड्रम से बाहर निकला, तो उसका पूरा शरीर गहरे नीले रंग का हो चुका था। वह चुपचाप जंगल लौट आया।
जंगल का नया राजा
सुबह जंगल के जानवरों ने एक अजीब नीले रंग का जानवर देखा। ऐसा प्राणी उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। शेर, बाघ, हाथी — सब डर गए।
चालाक सियार ने मौका देखा और भारी आवाज़ में बोला, “डरो मत! मुझे स्वयं ब्रह्मा जी ने तुम्हारा राजा बनाकर भेजा है। मेरा नाम ककुद्रुम है। अब से मैं इस जंगल पर राज करूंगा।”
भोले जानवरों ने उसकी बात मान ली। शेर उसका सेनापति बना, बाघ पहरेदार, और सब उसके लिए रोज़ अच्छा-अच्छा खाना लाने लगे। नीले सियार ने सबसे पहले अपने जैसे दूसरे सियारों को जंगल से बाहर निकलवा दिया, ताकि कोई उसे पहचान न ले।
हुआं-हुआं और असलियत
कुछ दिन आराम से बीते। फिर एक चांदनी रात को दूर से सियारों का एक झुंड “हुआं-हुआं” की आवाज़ करने लगा।
यह आवाज़ सुनते ही नीले सियार से रहा नहीं गया। अपनी आदत से मजबूर होकर वह भी गर्दन उठाकर ज़ोर से चिल्ला पड़ा — “हुआं-हुआं!”
शेर और बाघ चौंक गए। “अरे! यह तो सियार की आवाज़ है! इसने हमें धोखा दिया!” सारे जानवरों को सच समझ आ गया। गुस्साए जानवरों ने उसे दौड़ा दिया और नकली राजा हमेशा के लिए जंगल से भाग गया।
📖 कहानी की सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि झूठ और दिखावे से मिला सम्मान ज़्यादा दिन नहीं टिकता — असलियत एक न एक दिन सामने आ ही जाती है। साथ ही, अपनों से दूरी बनाकर और दूसरों को धोखा देकर कोई सच्चा राजा नहीं बनता।
कहानी के पात्र
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| चंडरव (नीला सियार) | चालाक सियार, जो नीला होकर नकली राजा बना |
| शेर, बाघ, हाथी | जंगल के जानवर, जिन्हें सियार ने धोखा दिया |
| दूसरे सियार | जिनकी आवाज़ से असलियत खुली |
बच्चों से पूछें
- सियार का रंग नीला कैसे हुआ?
- नीले सियार की पोल कैसे खुली?
- क्या दिखावा करके पाई गई तारीफ़ सच्ची होती है?
यह कथा पंचतंत्र के पहले तंत्र “मित्रभेद” की प्रसिद्ध कहानी का हमारे अपने शब्दों में पुनर्कथन है। और पढ़ें: चतुर खरगोश और शेर · पंचतंत्र की कहानियां
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नीला सियार कहानी की सीख क्या है?
यह कहानी सिखाती है कि झूठ और दिखावे से मिला सम्मान ज़्यादा दिन नहीं टिकता। नीले सियार ने राजा बनकर सबको धोखा दिया, पर एक रात अपनी आदत से मजबूर होकर “हुआं-हुआं” चिल्ला उठा और उसकी असलियत खुल गई।
सियार नीला कैसे हो गया?
शहर के कुत्तों से बचकर भागते हुए सियार एक धोबी के आंगन में घुस गया और अंधेरे में नील से भरे ड्रम में गिर पड़ा। जब वह बाहर निकला, तो उसका पूरा शरीर गहरे नीले रंग का हो चुका था, जिसे देखकर जंगल के जानवर डर गए।
नीले सियार की पोल कैसे खुली?
एक चांदनी रात को दूर से सियारों के झुंड ने “हुआं-हुआं” की आवाज़ की। अपनी पुरानी आदत के कारण नीला सियार भी ज़ोर से वैसे ही चिल्ला पड़ा। उसकी आवाज़ सुनकर शेर और बाकी जानवर समझ गए कि वह कोई अनोखा राजा नहीं, बल्कि एक सियार है।
नीला सियार कहानी पंचतंत्र के किस भाग में है?
नीला सियार की कहानी पंचतंत्र के पहले तंत्र “मित्रभेद” में आती है। मूल कथा में सियार का नाम चंडरव बताया जाता है। यह कहानी सिखाती है कि अपनी असली पहचान छिपाकर और अपनों से दूर होकर किया गया राज टिकता नहीं।